रात की बात,  ‘लेखक – रमानाथ अवस्थी’

रात की बात 
लेखक – रमानाथ अवस्थी


 

चंदन है तो महकेगा ही
आग में हो या आँचल में

छिप न सकेगा रंग प्यार का
चाहे लाख छिपाओ तुम
कहनेवाले सब कह देंगे
कितना ही भरमाओ तुम

घुँघरू है तो बोलेगा ही
सेज में हो या सांकल में

अपना सदा रहेगा अपना
दुनिया तो आनी-जानी
पानी ढूँढ़ रहा प्यासे को
प्यासा ढूँढ़ रहा पानी
पानी है तो बरसेगा ही
आँख में हो या बादल में

कभी प्यार से कभी मार से
समय हमें समझाता है
कुछ भी नहीं समय से पहले
हाथ किसी के आता है

समय है तो वह गुज़रेगा ही
पथ में हो या पायल में

बड़े प्यार से चाँद चूमता
सबके चेहरे रात भर
ऐसे प्यारे मौसम में भी
शबनम रोई रात भर
 

दर्द है तो वह दहकेगा ही
घन में हो या घानल में !

 

हिन्दी साहित्य में कुछ ऐसे लेखक और कवि हुये जिन्हे आज की पीड़ी ने कभी पढ़ा ही नहीं या उनको उतना सम्मान नही मिला जिसके वो हकदार थे अब उनके जाने के बाद हम उनकी याद मे उनकी एक कविता को अपने ब्लाग मे स्थान देखर खुद को बहुत ही गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ |

 

Advertisements
HINDI POETRY में प्रकाशित किया गया

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s